हिंदी पत्रकारिता के विविध चरण

नीरजा सिंह

Abstract


आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक हिंदी अपनी संप्रेषणीयता से जन भावना को अभिव्यक्त करती रही है| जन संप्रेषण की अभिव्यक्ति के लिए परंपरागत साधनों के साथ-साथ शिलालेखों, मुद्राओं, अभिलेखों का प्रयोग किया जाता रहा है| जनमानस को बौद्धिक स्तर से लेकर के विश्व स्तर पर जोड़ने का कार्य पत्रकारिता विधा ने किया और सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, जागरुकता पैदा की  | 1000 से अधिक वर्षों को पार कर चुकी हिंदी अपने विकास के कई चरणों से होकर गुजर चुकी है| प्रारंभिक दौर में हिंदी संस्कृत की आख्यायिका  ही बनी रही | किसी भी भाषा का विकास तभी संभव है जब लोकमत की अभिव्यक्ति उस भाषा में होने लगे और हिंदी ने इस दायित्व को बखूबी निभाया है |


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